हैपेटाइटिस-सी संक्रमित रक्त से रक्त का संपर्क होने से फैलता है

जब विषाणु (वायरस) से संक्रमित किसी व्यक्ति का रक्त किसी दूसरे व्यक्ति के रक्तप्रवाह में चला जाए, तो हेपेटाइटिस-सी फैल सकता है। ऐसा आमतौर पर त्वचा के छिलने से अथवा नाक, मुंह या गुदा की आन्तरिक नर्म परत के छिलने से हो सकता है।  हैपेटाइटिस-सी एक बहुत ही सशक्त विषाणु (वायरस)  है और यह शरीर के बाहर भी कई दिनों तक जीवित रह सकता है। यहां तक कि सूख चूके संक्रमित रक्त से भी फैल सकता है।

निम्न लिखे कुछ तरीकों द्वारा हैपेटाइटिस-सी आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है:-

  • असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियां जैसे शल्य चिकित्सा, रक्त संचारण ओर टीकाकरण में पुनः इस्तेमाल किये गए अस्वच्छ उपकरणों का प्रयोग
     
  • कनाडा में 1992 से पहले किए गए रक्त संचारण  बहुत ही जोखिम से भरे थे, क्योंकि साल 1992 से पहले इस विषाणु (वायरस)  के लिए रक्त की नियमित जांच नहीं होती थी।  अगर रक्त की जाँच नहीं की गई है, तो रक्त संचारण से सक्रमण का खतरा बना रहता है। यदि कनाडा आने से पहले आपने कभी रक्त संचारण करवाया है, तो बहुत मुमकिन है कि आप को बिना जांच किया गया रक्त दे दिया गया हो।
     
  • दवाओं और नशीले पदार्थों (ड्रग्स) को तैयार करने अथवा मिल-बाटं कर इस्तेमाल की जाने वाली सुईयों व अन्य उपकरणों पर रक्त   लगा रह सकता है जो कि कई बार इतना सूक्ष्म हो सकता है कि आपको दिखाई भी न दे। इसलिए चाहे इन उकरणों को केवल एक बार ही साझां किया गया हो, खतरा हमेशा बना रहता है। काँच के पाइप, फूक़ंनी (स्ट्रॉ) अथवा रुपये जिन्हें लोग मादक द्रव्य सूघने अथवा नाक द्वारा खींचने के लिए प्रयोग करते हैं। उन पर भी फटे हुए होंठों या हल्की-सी नकसीर के कारण रक्त जमा हो सकता है।
     
  • शरीर गुदवाने के (टैटू), शरीर छिदवाने के अथवा एक्युपंक्चर में प्रयोग होने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान इन उपकरणों जैसे स्याही, सुइयों आदि में संक्रमित रक्त लगा रह सकता है। यदि इन्हें बिना साफ (विषाणु रहित) किये फिर से इस्तेमाल किया जाये तो हैपेटाइटिस-सी फ़ैल सकता है।
     
  • व्यक्तिगत वस्तुओं का मिलबांट कर या उधार मागं कर इस्तेमाल जैसे कि रेजर, टूथब्रश या नेल कटर इत्यादि पर संक्रमित रक्त लगा रह सकता है, जिससे हैपेटाइटिस-सी फ़ैल सकता है। उदाहरण के तौर पर सार्वजनिक नाई, विषाणु रहित (स्टरलाइज) किए  बिना ही उस्तरे का पुनः इस्तेमाल कर सकता है।
     
  • असुरक्षित यौन संबंध जिसमें रक्त आने की सम्भावना हो (उदाहरण के तौर पर, मासिक धर्म के समय संभोग, जबरन या कठोर संभोग, अथवा गुदा मैथुन) तो यह विषाणु संचारित हो सकता है।
     
  • गर्भावस्था या प्रसव के दौरान बच्चे को वायरस से संक्रमित होने का खतरा बहुत कम होता है। स्तनपान के दौरान भी हैपेटाइटिस-सी से संक्रमित होने का खतरा नहीं  होता है। जब तक कि किसी भी कारण से स्तन के चुचकों मे ज़ख्म या दरारे नं हों और उनसे रक्त न आ रहा हो।